19 April 2020

वैश्विक महामारी में भारतीय अपना रहे योग एवं आयुर्वेद: कुलपति


रिपोर्ट :कुमकुम

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय तकनीकी संस्थान में इम्पोर्टेंस ऑफ इंडियन एनशियेन्ट कल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंड स्पिरिचुअलईटी इन साइड इफेक्ट ऑफ कोविड-19 विषय पर एक दिवसीय वेबिनार ज्ञानसेतु संवाद आयोजित किया गया। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के प्रो0 कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में विज्ञान नहीं बल्कि भारतीय जीवन ही विज्ञान है। भगवान श्रीराम का पूरा चरित्र ही भारत का चरित्र है। उस काल खंड में राम सेतु का बनना, पुष्पक विमान का बनना आज के विज्ञान की घटना के उदहारण है। उस समय कोडिंग डिकोडिंग थी कि मनुष्य बंदर की व अन्य जीवों की भाषा समझ लेता था। आज भारत को कोविड महामारी से बचाव के लिए आवश्यक निर्देशों का पालन करना चाहिए, क्योंकि हम भारतीयों का खान-पान भी वैज्ञानिक ही है जो हर मौसम एवं वातावरण के लिए अलग है। भारतीय भोजन में आज भी लोग शाकाहार पसंद करते है और वे स्वस्थ भी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने युगानुकूल विज्ञान की चर्चा की जिसमे सूक्ष्मता को अध्यात्म की मदद से स्थूलता से जोड़ने की प्रक्रिया को आवश्यक बताया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी की चर्चा करते कहा कि वे अध्यात्म के साथ विज्ञान की भी बात करते थे। पुरानी भारतीय शिक्षा पद्धति को वैज्ञानिक एवं आधात्मिक दोनों का स्वरुप बताया था। कुलपति ने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति को मुगलों से उतना नुकसान नहीं हुआ क्योंकि भक्ति काल के सभी महान कवि और उनकी रचना मुगल काल में ही हुई। मुगल भारतीय अध्यात्म को कभी खत्म करने की सोच ही नहीं पाए। लार्ड मैकाले ने धीरे धीरे यहाँ की शिक्षा व्यवस्था को तहस नहस कर दिया। धीरे धीरे हमारे गुरुकुल खत्म हुए, आयुर्वेद खत्म हुआ, योग से हम दूर हुए। लेकिन कोरोना महामारी ने आज पूरे विश्व को भयभीत किया है और पूरा विश्व आज भारत की ओर देख रहा है और आज इस वैश्विक महामारी में भारतीय आयुर्वेदएवं योग को अपना रहे है। भारतीय बुद्धजीवी भी युगानुकूल विज्ञान को महत्व दे रहे है। 

अमेरिका से सीधे ऑनलाइन जुड़े विशिष्ट अतिथि डॉ0 राहुल ने बताया कि अध्यात्म और संस्कृति और संस्कार तीनो आज के विज्ञान का वृहद रूप है और जिस देश में ये तीनो गुण हैं वो कोविड महामारी या पूर्व में भी किसी महामारी से कम प्रभावित हुआ है। आज राजनीति का समय नहीं बल्कि देश को एकजुट रहकर कोरोना महामारी से बचने के उपाय को प्रचारित एवं प्रसारित करने की समय है। दुनिया का सबसे समृद्ध देश जहाँ मेडिकल सुविधा पूरे विश्व में श्रेष्ठ है वहाँ कोरोना से चालीस हजार लोग मर चुके है। भारत, चाइना देश के पड़ोस में भी रहकर इस महामारी से कम प्रभावित हुआ तो उसका सबसे बड़ा कारण भारतीयों के संस्कार है। आज नमस्ते जिसको पश्चिम के देश पिछड़ेपन की निशानी बताते थे आज डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री तक नमस्ते कर रहे है। 

सत्र के प्रथम वक्ता डॉ0 सुधीर मिश्र योगाचार्य ने भारतीयों को योग करने का सुझाव दिया और कहा कि भारतीयों को पंचतत्व थ्योरी को समझना चाहिए जो प्रकृति द्वारा पोषित होता है। आज आवश्यकता है, प्राण एवं श्वास में अंतर समझने की। सत्र के दूसरे वक्ता सुमित सक्सेना ने डिजाइन थिंकिंग के विभिन्न पहलुओ को बताया और कहा कि भारतीय खुद में इतने व्यस्त है कि दूसरों की मदद करना भूल गए है। आज आवश्यकता है, दूसरों की मदद करना। तीसरे वक्ता आयुर्वेदाचार्य डॉ0 कृष्ण कुमार द्वारा इस महामारी से निपटने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की बात कही और उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेद सक्षम है कोविड से लड़ने में। विश्व विद्यालय के प्रो0 राम नयन राय ने संयम बरतने की आवश्यक बताया।

कार्यक्रम का संचालन संस्थान के निदेशक प्रो0 रामपति मिश्र ने किया। तकनीकी संचालन इं0 पारितोष त्रिपाठी तथा इं0 रमेश मिश्र ने किया। डाॅ0 संजीत पांडेय ने बताया कि फेसबुक लाइव एवं विश्वविद्यालय की वेबसाइट सजीव प्रसारण को कुल 500 प्रातिभागियो द्वारा देखा गया। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ विनोद सिंह, परीक्षा नियंत्रक उमानाथ, उपकुलसचिव विनय सिंह, डॉ0 बृजेश ,विनीत सिंह, डॉ0 वंदिता पाण्डेय, शाम्भवी, आस्था, आशुतोष सहित अन्य वेबिनारी से जुड़े रहे।

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