09 February 2020

अवधि को जिंदा रखने के लिए बोलचाल में शामिल करना जरूरी- रितेश रजवाड़ा

रिपोर्ट:-अंकित सेन 

अवधी को जिंदा रखने के लिये बोलचाल में शामिल करना जरूरी- रितेश रजवाड़ा

अवधी खड़ी बोली और भोजपुरी के बीच पिस रही है, यदि अवधी को हम संवाद में नहीं लायेंगे तो यह खत्म हो जायेगी, इसलिये अवधी को जिंदा रखने के लिए बोला जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि कागज में लिखे होने से कोई भी भाषा बढ़ती नहीं है बल्कि लगातार बोले जाने से बढ़ती है। उक्त बातें बाहुबली-3 के डाॅयलाग डायरेक्ट व कवि रितेश रजवाड़ा ने कबीर संस्थान की ओर से आयोजित शब्दश्री सम्मान एवं काव्य समारोह में शिरकत करते हुये कही। बाहुबली-3 पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बाहुबली-3 बहुत ही रोचक फिल्म है, जिसे देखने में बहुत ही मजा आयेगा। कबीर संस्थान की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में विख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध ही नहीं किया बल्कि समाज, देश व पर्यावरण के प्रति जागरूक कर उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को निर्वहन करने का संदेश भी दिया। विख्यात हास्य कलाकार ताराचंद तन्हा की अध्यक्षता में बाहुबाली-3 के डाॅयलाग डायरेक्टर रितेश रजवाड़ा को शब्दश्री शिखर सम्मान, अम्बेडकरनगर जिले के पत्रकार घनश्याम भारतीय को शब्दश्री सम्मान व संतोष तिवारी को शब्दश्री युवा से सम्मान से नवाजा गया। इससे पूर्व कार्यक्रम में आये अतिथियों ने मां सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर उनका आशीर्वाद लिया। कबीर संस्थान के अध्यक्ष व कवि ताराचंद तन्हा ने कहा कि हम लोगों ने शब्दश्री सम्मान का आयोजन किया है, यह दूसरा सम्मान समारोह है, जिसमें कई विख्यात लोगों को सम्मानित किया गया है, उन्होंने कहा कि शब्द ही ब्रह्म है और शब्द ही ऐसे होते है कि आप शब्द से सम्मान भी पाते हैं और अपने शब्दों से अपमानित भी होते हैं। इस सम्मान समारोह में शिरकत कर रहे कवियों ने अपनी काव्य रचनाओं से लोगों के दिलों में एक नई स्फूर्ति का संचार कर दिया। सम्मान समारोह का संचालन कर रहीं विख्यात महिला कवि निरूपमा श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं से सभी का दिल जीता। इस अवसर में दयानंद सिंह मृदुल, सुदामा, सिंह, सुमति, सहित कई कवियों ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से महौल का खुशनुमा किया।

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