अध्यात्म की नगरी अयोध्या में राम की पैड़ी और पवित्र सरयू तट पर क्रीड़ा भारती द्वारा “रन फॉर राम संवाद” का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आगामी ‘रन फॉर राम मैराथन 2026’ के संदर्भ में आयोजित हुआ, जिसमें खेल, अध्यात्म और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों, प्रशासकों, विद्वानों और युवा प्रतिभागियों ने इसमें सहभागिता की।
कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों, उनकी मर्यादा, राष्ट्र निर्माण में उनकी प्रेरक भूमिका तथा सनातन संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता पर व्यापक चर्चा की गई। “वनवास से फिनिश लाइन तक” विषय पर वक्ताओं ने श्रीराम की तपस्या, धैर्य और संघर्ष की तुलना मैराथन धावकों की सहनशक्ति और अनुशासन से की।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि ‘रन फॉर राम’ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में सरकार सकारात्मक पहल करेगी। उन्होंने कहा कि यह मैराथन फिटनेस, आस्था और एकता को बढ़ावा देने वाली अनूठी पहल है। उन्होंने अपनी खेल यात्रा का उल्लेख करते हुए युवाओं को निरंतर प्रयास और अनुशासन का संदेश दिया।
उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि खेल और अध्यात्म का समन्वय भारतीय परंपरा की पहचान है। उन्होंने घोषणा की कि ‘रन फॉर राम’ मैराथन को आधिकारिक स्वरूप देकर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा, ताकि विभिन्न देशों के धावक इसमें भाग ले सकें।
पद्मश्री से सम्मानित पैरा ओलंपियन प्रवीण कुमार ने विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी खेल में उत्कृष्टता तपस्या के समान है, जिसके लिए समर्पण और दृढ़ संकल्प आवश्यक है।
संवाद में अयोध्या को वैश्विक आध्यात्मिक-खेल गंतव्य के रूप में विकसित करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। आयोजकों के अनुसार यह केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और राष्ट्रभाव का महोत्सव है, जो युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ जीवनशैली की ओर प्रेरित करेगा।

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